chitra-sankalan
Friday, April 6, 2012
acylic on canvas board
abstraction
by dr jsb naidu
10 x 12 inches
05 april 2012
Thursday, March 8, 2012
कल - जो बीत चुका और आज ..
कल जो बात चुका है वह अब लौट कर तो आने वाला नहीं लेकिन यादें तो आज भी साथ-साथ हैं
एक ज़िंदगी - कई चेहरे ..
डिजीटल-अभिव्यक्ति ..
Friday, November 26, 2010
शब्द-चित्र ..
कि / फटे हुए कोट से / विद्वता / बाहर झांक रही है .. / या कि / बाहर की मूखर्ता / अन्दर / झांक रही है .. / मैंने कहीं पढ़ा था .. / पढ़कर / मैं सोच रहा था ..
Thursday, February 4, 2010
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